कुत्तों और मवेशियों की मदद करें: सामुदायिक कुत्तों को आजीवन मानव स्वाहदाह चिता के माप की जगह में कैद करने की योजना को रोकें – अभी आवाज़ उठाएँ

 

PETA इंडिया ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, तथा भारत के एनिमल वेलफेयर बोर्ड (AWBI) को दो विस्तृत विज्ञान-आधारित रोडमैप भेजे हैं। यह दोनों रोडमैप अहिंसा और वसुधैव कुटुम्बकम् के सिद्धांतों पर आधारित हैं और भारत में सामुदायिक कुत्तों और बेघर मवेशियों की जनसंख्या को मानवीय और प्रभावी तरीके से प्रबंधन करने के समाधान पेश करते हैं। साथ ही, ये उन प्रस्तावों का कड़ा विरोध करते हैं जो पशुओं को भीड़भाड़ और कम संसाधनों वाली सुविधाओं में जीवन भर कैद करने पर आधारित हैं।

यहाँ प्रधानमंत्री मोदी को भेजे गए दो रोडमैप की प्रतियां हैं:

  1. भारत में सामुदायिक कुत्तों के मानवीय प्रबंधन के लिए रोडमैप

  2. भारत में बेघर मवेशियों के मानवीय प्रबंधन के लिए रोडमैप

ये दस्तावेज़ वैज्ञानिक, रोकथाम पर आधारित, कानूनी और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोणों को दर्शाते हैं, जो कुत्तों और मवेशियों की जनसंख्या प्रबंधन के लिए प्रभावी हैं।

PETA इंडिया ने AWBI की उस SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें प्रस्ताव है कि सामुदायिक कुत्तों को जीवन भर प्रति पशु 20 वर्ग फुट के पिंजरे में रखा जाए, जो लगभग पारंपरिक अंतिम संस्कार की चिता के आकार के बराबर है। यह प्रतीकात्मक रूप से सही है क्योंकि इन शेल्टरों में कुत्तों को कैद करना उन्हें मौत की सजा देने के समान है।

यह वीडियो देखें, जिसमें दिखाया गया है कि कुत्तों को जीवन भर कैद में रखने का क्या मतलब होगा।


 

पशु कल्याण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस तरह कुत्तों को कैद करना क्रूरता को नियमित कर उसे बढ़ावा देगा, जूनोटिक रोगों के जोखिम को बढ़ाएगा, पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 की आवश्यकताओं जैसे नसबंदी और रेबीज़ के टीकाकरण से सार्वजनिक संसाधनों को भटका देगा, और अंततः यह व्यवस्था अपने ही बोझ तले ढह जाएगी। भारत में स्वतंत्र रूप से बेघर जीवन यापन करने वाले कुत्तों की जनसंख्या लगभग 6.2 करोड़ है और आबादी के एक छोटे से हिस्से को भी बंद रखने के लिए न तो पर्याप्त बुनियादी ढांचा है, न वित्तीय संसाधन और न ही प्रशासनिक क्षमता, जिससे व्यापक पीड़ा और सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम का खतरा अवश्य बढ़ेगा।

इसी तरह, मवेशियों (गायों एवं भैंसों) का परित्याग मुख्य रूप से डेयरी संचालकों द्वारा किया जाता है, और मौजूदा कानूनों के कमजोर प्रवर्तन के कारण यह और बढ़ जाता है। नर बछड़े जन्म के तुरंत बाद अक्सर छोड़ दिए जाते हैं, जबकि मादा गायों एवं भैंसों को उनके दूध उत्पादन में गिरावट आने पर परित्याग कर दिया जाता है, जो उनके प्राकृतिक जीवनकाल के लगभग एक चौथाई से एक तिहाई के समय में होता है। अच्छी तरह से नियंत्रित न किए गए और अवैध डेयरी फार्म, साथ ही भीड़भाड़ वाले गोशालाएं, गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा करते हैं। तंग कैद, स्वच्छता की कमी और अपर्याप्त पशु चिकित्सा देखभाल मानव और पशुओं दोनों में फैलने वाली बीमारियों के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं, जिनमें जिनमें ब्रुसेलोसिस, गायों का क्षय रोग (Bovine Tuberculosis – Mycobacterium bovis), लेप्टोस्पाइरोसिस, सैल्मोनेलोसिस और रोगजनक ई.कोलाई संक्रमण शामिल है। 

प्रस्तावित रोडमैप में सुझाए गए उपाय :

सामुदायिक कुत्तों के लिए: एबीसी नियम, 2023 का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन; छोटे पैमाने पर नसबंदी और रेबीज़ टीकाकरण क्षमता का विस्तार; अवैध ब्रीडर्स और पालतू पशुओं की बिक्री करने वाली दुकानों पर रोक; कुत्तों की अवैध लड़ाइयों में इस्तेमाल होने वाली विदेशी कुत्तों की प्रजातियों के प्रजनन पर प्रतिबंध; पशुओं को भोजन कराने वालों (community feeders) की सुरक्षा; तथा बेघर पशुओं को गोद लेने के लिए मजबूत सरकारी प्रोत्साहन जैसे उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।

मवेशियों के लिए प्रस्तावित रोडमैप में उनके परित्याग के खिलाफ सख्त दंड; अवैध डेयरियों को बंद करना; डेयरियों तक मवेशियों की ट्रेसबिलिटी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उपाय; पशुओं का प्रजनन रोकने के लिए गौशालाओं का नियमन; डेयरी पशुओं पर निर्भरता कम करने हेतु पौधों से बने दूध के उत्पादन को बढ़ावा देने वाली खाद्य नीतियाँ, जैसे उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।

 आप मदद कैसे कर सकते हैं

PETA इंडिया के साथ जुड़ें और मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय और भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड से आग्रह करें कि वे कुत्तों और मवेशियों की जनसंख्या प्रबंधन के लिए PETA इंडिया की कानूनी और नैतिक सिफारिशों पर विचार करें।

 

Shri
Naresh
Pal Gangwar
Department of Animal Husbandry, Dairying and Fisheries
Shri
Rajiv
Ranjan Singh 
Hon'ble Minister of Fisheries, Animal Husbandry and Dairying
Dr.
Muthukumarsamy
B.
Animal Welfare Board of India

कृपया कार्यवाई करें 

 

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