घोड़ों एवं खच्चरों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार को रोकने में मदद करें। 

वर्ष 2015 में भारतीय पशु कल्याण बोर्ड ने विशेषज्ञों के एक दल को विषरोधक तथा विषनाशक बनाने वाली 10 कम्पनियोंकी जांच के लिए अधिकृत किया। सिर्फ एक कम्पनी जो यह काम खुद न करके एक बाहरी एजेंसी कराती है को छोड़कर बाकी 9 कम्पनियां विषरोधक तथा विषनाशक दवाएँ बनाने के लिए घोड़ों व खच्चरों से बड़ी मात्रा में खून प्राप्त करती हैं। जांचकर्ताओं ने पाया कि बहुत से जानवर एनीमिया, खून बहने वाले संक्रमित घावों तथा अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे।

जांचकर्ताओं ने जांच के दौरान इन कम्पनियों में अनेकों ऐसे साक्ष्य देखे जो कानून का स्पष्ट उलंघन करते थे। बहुत सी कम्पनियाँ जानवरों पर इस प्रकार के कार्य करने वाली समिति “कमेटी फॉर पर्पस ऑफ कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट ऑन एनिमल्स (CPCSEA)” के तहत पंजीकृत नहीं थी। यह कंपनियाँ ब्रीडर के रूप में आधिकारिक तौर पर पंजीकृत नहीं थी लेकिन फिर भी कुछ कंपनियों में गर्भवती घोड़ियाँ एवं छोटे बच्चे देखे गए।

“जानवरों के लिए क्रूरता की रोकथाम अधिनियम 1960” के तहत ऐसे जिम्मेदार लोगों की आवश्यकता होती है जो जानवरों को अनावश्यक पीड़ा व दुख से बचाने का हर संभव प्रयास करें व उनका कल्याण सुनिश्चित करें। किन्तु जांचकर्ताओं ने पाया की इन सुविधाग्रहों में जानवर बहुत सी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित होने के साथ साथ चिंतित व भयभीत थे। जब कोई मनुष्य उनके पास जाता तो वह दूर भागने का प्रयास करते थे। सामान्य शारीरिक समस्याओं में पीड़ित इन जानवरों को मुख्यता कुपोषण, संक्रमण, परजीवी, अंगों में सूजन, पैरों के खुरों में चोटें, असामान्य चाल तथा आंखो से कम दिखाई देना जैसी समस्याएँ थी। इन कम्पनियों में पशुपालन की आधारभूत प्रक्रियाओं को भी नजरअंदाज किया गया था जैसे उनके दाँतो की देखभाल व खुरों की कटिंग का काम। 

इन कम्पनियों में पशुओं से जल्द खून निकालने के लिए प्रायः दर्दनाक लंबी सुइयों का इस्तेमाल किया जा रहा था। 

“कमेटी फॉर पर्पस ऑफ कंट्रोल एंड सुपरविजन ऑफ एक्सपेरिमेंट ऑन एनिमल्स (CPCSEA)” के दिशानिर्देशों के अनुसार कम्पनियों में घोड़ों व उनकी प्रजाति के अन्य सदस्यों के लिए रेत स्नान, दैनिक व्यायाम, दैनिक साफ सफायी, सामाजिकरण के अवसर, चराई हेतु खुले मैदान तथा सोने के लिए कंक्रीट के पक्के फर्श की जगह साफ बिस्तर का होना अनिवार्य है। किन्तु इन कम्पनियों में जानवरों को भीड़भाड़ वाले छोटे बंजर खेतों में रस्सी से बांध कर रखा गया था जहां उनके पास घूमने फिरने की पर्याप्त जगह तक नही थी। बहुत से घोड़े तो अपने ही मल-मूत्र में खड़े थे व कुछ कोहनी की चोट से पीड़ित थे यह एक प्रकार दर्दनाक सूजन होती है जो अक्सर पक्के फर्श पर बैठने की वजह से विकसित हो जाती है।

किंग संस्थान में घोडा नंबर 48, बायीं आँख से नेत्रहीन पाया गया।

किंग संस्थान में घोड़े के खुर का कुछ भाग गायब है, इस जख्मी खुर में कीड़े पड़ चुके हैं।

किंग संस्थान में घोडा नंबर 299 बेहद कमजोर है, उसके शरीर पर जख्म थे व वो अपने पैरों पर लंबे समय तक खड़ा नहीं रह सकता। 

किंग संस्थान में इस घोड़े के सर की हड्डी उभरी हुई थी जो की चोट या मार के कारण हुआ है, यह गंभीर है। 

 इस घोड़े के सर की हड्डी उभरी हुई थी जो की चोट या मार के कारण हुआ है, यह गंभीर है। 

प्रीमियम सीरम संस्थान में यह घोडा एनीमिया से पीड़ित पाया गया 

यह घोड़ा एनीमिया व संक्रमण से पीड़ित है

इस घोड़े के दाँतो की साफ सफाई नहीं की जा रही 

इस घोड़े की गर्दन एवं पीठ पर गहरे घाव हैं।

प्रीमियम सीरम संस्थान में घोड़ा नंबर 683 के आगे के दायें पाँव में खुर की हड्डी गल चुकी है।

प्रीमियम सीरम संस्थान में घोड़ा नंबर P2 के बाएँ पैर के घुटने में सूजन है। 

मेडिक्लोन संस्थान में यह घोड़ा इस आँख से देख नहीं सकता

मेडिक्लोन संस्थान में 53 नंबर घोड़े के घुटने में गहरा घाव है। 

मेडिक्लोन संस्थान का यह घोड़ा कुपोषित है व पैरों की हड्डियाँ कमजोर हैं

मेडिक्लोन संस्थान की यह घोड़ी 7 माह की गर्भवती है

मेडिक्लोन संस्थान के घोड़ा नंबर 412 के पिछले दायें पाव में गांठ एवं सूजन

भारत सीरम के घोड़ा नंबर ए248 के छेरे पे यह खुला घाव, उसे उपचार तक नहीं दिया गया।

भारत सीरम में इस घोड़े की आँख के नीचे चोट के निशान व आँखों में सूजन

पैरों का रंग व बनावट इस घोड़े में एनिमिया व संक्रमण का संकेतक है

भारत सीरम में इस घोड़े के पैरों में गांठ व सूजन

हेफकिंस संस्थान में घोड़ा नंबर 853 की आँख में सूजन एवं जख्म है तथा यह त्वचा रोग से पीड़ित है

हेफकिंस संस्थान में 87 नंबर घोड़े की पीठ पर खुला घाव

हेफकिंस संस्थान में 341 नंबर खच्चर के घुटनों में गाँठे 

हेफकिंस संस्थान में 817 नंबर खच्चर के खुरों की हड्डियाँ गल चुकी हैं

हेफकिंस संस्थान में घोड़ा नंबर 41 के कान के पास छेद का निशान, यह ब्रांडिंग टैग लगाने के लिए किया गया था।

राऊत सीरम संस्थान में घोड़ा नंबर 980 के पैरों का टेड़ा-मेड़ा होना 

राऊत सीरम संस्थान में घोड़ा नंबर 848 के सिर के पिछले भाग में गहरा घाव

जूँ के अंडो से भरे बालों वाला यह घोड़ा-राऊत सीरम संस्थान 

राऊत सीरम संस्थान में बेहद कमजोर शरीर वाला यह घोड़ा 

राऊत सीरम संस्थान में घोड़े के चोटिल खुर

VINS संस्थान में घोड़े की आँख से मवाद के निशान व सूजन

VINS संस्थान में घोड़े की पीठ पर जलते हुए गर्म सरिये से ब्रांडिंग करने के निशान 

VINS संस्थान में घोड़े की पीठ पर जलते हुए गर्म सरिये से ब्रांडिंग करने के निशान 

VINS संस्थान में एक घोड़े के कान में कीड़ा पाया गया

VINS संस्थान में घोड़ा नंबर A34 के पिछले पैर की गाँठो में सूजन है।

VINS संस्थान में घोड़ा नंबर 498 जमीन पर लेटा है, उसे अपने पैरों पर खड़ा होने में असमर्थ है।

VINS संस्थान में घोड़े की पीठ पर जलते हुए गर्म सरिये से ब्रांडिंग करने का निशान 

बायोलोजिकल ई संस्थान में घोड़ा नंबर 549 की आँख से मवाद गिरने का निशान

बायोलोजिकल ई संस्थान में घोड़ा नंबर 2 को चोट एवं संक्रमण की वजह से घुटने की ऊपरी परत गल चुकी है।

बायोलोजिकल ई संस्थान में घोड़ा नंबर 601 पैरों में गठिया रोग से पीड़ित है, वह लंगड़ा कर चल रहा था व पैरों में गाँठे पड़ चुकी थी। 

बायोलोजिकल ई संस्थान में इस घोड़े के बाएँ पैर का खुर बुरी तरह से गल चुका है, उसके पैर कमजोर है व अपने शरीर का बोझ नहीं उठा सकता

 

बायोलोजिकल ई संस्थान में घोड़ा नंबर 193 बायीं आँख के उपर चोट का निशान साफ देखा जा सकता है 

आप मदद कर सकते हैं, अधिकारियों से अनुरोध करें की वो विशरोधक तथा विषनाशक दवाएं बनाने हेतु घोड़ों की जगह आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने की कार्यवाही कर इन मासूम जानवरों को दुर्व्यवहार, पीड़ा, यातना एवं अत्याचार से मुक्ति दिलाएँ। ​

 
Dr.
O.P.
Chaudhary
Department of Animal Husbandry and Dairying, Ministry of Agriculture and Farmers Welfare,

घोड़ों तथा खच्चरों की पीड़ा समाप्त करने हेतु कार्यवाही करें

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